करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान | रसरी आवत जात तै सिल पर होत निशान |jadmati hot sujan meaning in hindi
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| करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान (अनुच्छेद लेखन)|jadmati hot sujan ka arth |
लोग इसे निम्न प्रकारसेभी खोजते हे
"जड़मति (Jadmati) का अर्थ होता है मंदबुद्धि या मूर्ख व्यक्ति।"
"यह करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान (Jadmati hot sujan doha) हमें सिखाता है कि..."
| करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान: अर्थ, व्याख्या और प्रेरणादायक कहानी |
करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान का अर्थ और व्याख्या
दोहा:
करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात ते, सिल पर परत निसान॥
हिंदी में अर्थ:
निरंतर अभ्यास करने से मूर्ख (जड़मति) व्यक्ति भी चतुर और बुद्धिमान बन जाता है। ठीक उसी प्रकार, जैसे कुएं की मुंडेर के पत्थर (सिल) पर कोमल रस्सी के बार-बार आने-जाने से गहरे निशान बन जाते हैं।
मुख्य शब्दों के अर्थ (Word Meanings):
जड़मति (Jadmati): जिसकी बुद्धि जड़ हो, यानी मूर्ख या मंदबुद्धि।
सुजान (Sujan): बुद्धिमान, चतुर या ज्ञानी।
रसरी: रस्सी।
सिल: पत्थर।
अभ्यास का महत्व और वरदराज की कहानी
जीवन का कोई भी क्षेत्र हो—चाहे वह पढ़ाई हो, व्यापार हो या कला—सफलता केवल अभ्यास पर निर्भर करती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बालक वरदराज हैं। बचपन में वे पढ़ने में बहुत कमजोर थे, जिससे निराश होकर गुरु जी ने उन्हें घर भेज दिया था।
लौटते समय उन्होंने कुएं पर देखा कि बार-बार रगड़ खाने से कठोर पत्थर पर भी रस्सी ने निशान छोड़ दिए हैं। उन्होंने सोचा, "यदि कोमल रस्सी पत्थर को काट सकती है, तो क्या निरंतर अभ्यास से मुझे विद्या नहीं आ सकती?" वे वापस आश्रम गए और अपनी मेहनत के दम पर आगे चलकर 'लघुसिद्धांतकौमुदी' जैसे महान व्याकरण ग्रंथों की रचना की।
निष्कर्ष
चाहे वह खिलाड़ी हो, गायक हो या वैज्ञानिक, हर महान व्यक्ति के पीछे वर्षों का अभ्यास होता है। इसलिए हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और लक्ष्य प्राप्ति तक अभ्यासरत रहना चाहिए।

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